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मेरी शुभकामना

(इस कविता में देश के लिए, धर्म के लिए, गाय के लिए एक आदर्श शुभकामना प्रस्तुत की गई है। मानव की प्रकृति से दूरी तथा पैसों की प्रति आकर्षण को दिखाया गया है।) मैं शिव मंदिर गई, मैंने नंदी बैल देखा,  उनके कानों में सबको मन्नत मांगते देखा,  मैंने सोचा हाय! यह कैसी विधाता की लेखा, बैल को रोड पर भटकने पर मजबूर करने वाले लोगों ने, चांदी की कैसी सुंदर मूर्ति बैल की है बनाई!  मैंने भी अपनी मनोकामना उनके कानों मे जाकर सुनाई। मैंने मांगा नंदी से-- गोमाता न भटके  गली- गली। गंगा माता स्वच्छ रहे । गीता सबके व्यवहार में रहे । सब लोगों का आपस में प्यार रहे । विश्व सदा हमारा एक ही परिवार रहे। भ्रष्टाचार के रोग से कोई पीड़ित न रहे। हे नंदी देवता! मेरी यह मनोकामना स्वीकार करना  यदि ये मेरी भूल है तो मझे माफ करना। लोग अपने घर को सजाते हैं,  पर गलियों को गंदा बनाते हैं, नहीं सोचते लक्ष्मी माता आएंगी कहां से? लोग मंदिर को पवित्र रखते हैं,  पर उसके बाहर अपवित्रता होती है, नहीं सोचते अपवित्र हो अंदर जाएंगे कैसे? हे प्रभु!  सबके मन को पवित्र कर दो।  कण- कण में तुम्हार...

जनता और सरकार

 (इस कविता में जनता और सरकार के बीच के संबंध बताए गए हैं।) यह कैसा दुर्भाग्य के देश का  है अपमान यह लोकतंत्र का जिसने है सरकार बनाई जिसने है उम्मीद लगाई उस जनता पर टैक्स लगाकर  महंगाई की आग मैं उसे जलाकर सरकार खाए मलाई हाय! यह कैसी बेवफाई? जब भी कोई योजना बनती जेब सिर्फ सरकार की भरती  छोटे-बड़े सब मिलकर खाते  ठेकेदार जी मौज है करते। जनता बिचारी कुछ ना पाई हाय! यह कैसी बेवफाई? काश जनता जाग जाती! पैसों का  वह हिसाब लेती  टैक्स के बदले सेवा  लेती  वोट के वक्त दिखाती तेवर  ये तेवर उसका बन जाता  जेवर फिर ना करता कोई उससे बेवफाई।    

अनोखा रक्षाबंधन

 (रक्षाबंधन का पावन त्योहार सिर्फ अपने परिवार तक ही नहीं सीमित रहना चाहिए बल्कि देश के सभी भाई - बहनों को मिलकर मानना चाहिए। कुछ ऐसी ही भावना इस कविता में दी गई है।) भाई - बहन के पावन पर्व की आप सभी को बधाई दुआ यही है सुनी ना रहे किसी  भाई की    कलाई। भारत माता के बच्चे हम सब, आपस में है भाई भाई  भारत माता के बच्चे हम सब, आपस में है भाई भाई चाहे कोई हिंदू - मुस्लिम चाहे हो वह सिख -इसाई। प्रेम की डोर से हम सभी की  कलाइयां  आपस में बंधी रहे । सिर्फ अपनी ही नहीं हर बहन  की  रक्षा  हर भाई करता रहे। ना कोई ईर्ष्या, ना कोई लालच, बस प्रेम ही  हम सबके दिलों में भरा रहे। और   रक्षाबंधन   का  ये        पर्व  हर वर्ष यूं ही मनता रहे। हर वर्ष यूं ही मनता रहे।

आज का विद्यार्थी

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 ( इस कविता में आज के विद्यार्थी के सपनों को पूरा करने  तथा उनकी परेशानियों को दूर करने की प्रेरणा दी गई  है।) छोटी सी उमर  में ही  बस्ते का बोझ   उठाकर  उज्ज्वल भविष्य का सपना आंखों में सजाकर कई अनकही बातों को अपने डर तले छुपा कर  विद्यालय  में  पढ़कर  अपने  ज्ञान  को  बढ़ाने देखो  चला   विद्यालय   आज   का   विद्यार्थी।  अपने  माता-पिता के   आंखों  का   तारा आने वाले उज्ज्वल भविष्य का उजियारा  शिक्षकों की आंखों का  चमकता  सितारा सबकी   उम्मीदों   को   पूरा   करने  देखो   चला   आज  का   विद्यार्थी। न जाने इसको, इसके योग्य विद्यालय मिलेगा कि नहीं? न जाने इसके प्रश्नों को कोई  शिक्षक सुनेगा  कि नहीं ? न   जाने    इसको,  इसका  लक्ष्य   मिलेगा  कि  नहीं? न जाने संघर्षशील, आदर्श विद्यार्...