मेरी शुभकामना

(इस कविता में देश के लिए, धर्म के लिए, गाय के लिए एक आदर्श शुभकामना प्रस्तुत की गई है। मानव की प्रकृति से दूरी तथा पैसों की प्रति आकर्षण को दिखाया गया है।)


मैं शिव मंदिर गई, मैंने नंदी बैल देखा, 

उनके कानों में सबको मन्नत मांगते देखा, 

मैंने सोचा हाय! यह कैसी विधाता की लेखा,

बैल को रोड पर भटकने पर मजबूर करने वाले लोगों ने,

चांदी की कैसी सुंदर मूर्ति बैल की है बनाई!

 मैंने भी अपनी मनोकामना उनके कानों मे जाकर सुनाई।

मैंने मांगा नंदी से--

गोमाता न भटके  गली- गली।

गंगा माता स्वच्छ रहे ।

गीता सबके व्यवहार में रहे ।

सब लोगों का आपस में प्यार रहे ।

विश्व सदा हमारा एक ही परिवार रहे।

भ्रष्टाचार के रोग से कोई पीड़ित न रहे।

हे नंदी देवता! मेरी यह मनोकामना स्वीकार करना 

यदि ये मेरी भूल है तो मझे माफ करना।


लोग अपने घर को सजाते हैं, 

पर गलियों को गंदा बनाते हैं,

नहीं सोचते लक्ष्मी माता आएंगी कहां से?

लोग मंदिर को पवित्र रखते हैं, 

पर उसके बाहर अपवित्रता होती है,

नहीं सोचते अपवित्र हो अंदर जाएंगे कैसे?


हे प्रभु!  सबके मन को पवित्र कर दो। 

कण- कण में तुम्हारा ही वास है,

हर आत्मा में यदि तुम्हारा ही प्रकाश है।

तो हमारा मन इतना मलिन क्यो?

तुम्हारा अंश होकर भी हम ज्ञान विहीन क्यों?


यदि हम सब की बुद्धि न सुधरी, 

दुनिया को हम रहने लायक नहीं छोड़ेंगे

हवा, धरती, पानी कुछ भी शुद्ध नहीं बचेगा। 

हर इंसान केवल पैसा- पैसा -पैसा रटेगा।


हे प्रभु! मेरी मनोकामना पर देना ध्यान।

ताकि बना रहे धरती माता का सम्मान।

मानव जाति को दो इतना ज्ञान --

करे सदा वो प्रकृति मां का सम्मान।




 


Comments

Popular posts from this blog

शादी की सालगिरह के लिए कविता

Worksheet for Hindi grammar