कैंसर के लक्षण कारण एवं उपचार

 (इस आर्टिकल में हम कैंसर के सभी प्रकारों के बारे में, वास्तव में कैंसर का क्या कारण है तथा किसी भी प्रकार के कैंसर को कैसे हम अपने भोजन और दिनचर्या में सुधार करके ठीक कर सकते हैं इन सभी बातों को जानेंगे।)


कैंसर सेल्स


कैंसर किसे कहते हैं?

जैसे पेड़ों के पत्ते मुरझाकर नीचे गिरते रहते हैं तथा उनके स्थान पर नए पत्ते आते रहते हैं। उसी प्रकार मानव शरीर में भी अनेक ऐसी कोशिकाएं हैं, जो हर मिनट मृत होती हैं, उनके स्थान पर नई कोशिकाएं भी उत्पन्न होती रहती है। शरीर में कहीं ना कहीं निरंतर कोशिका विभाजन का कार्य चलता रहता है। शरीर की नेचुरल इम्यूनिटी बेकार पड़ी कोशिकाओं को अशुद्ध रक्त अथवा अन्य उत्सर्जी पदार्थों के माध्यम से बाहर निकालती रहती है। कुछ कारणों से जब हमारी इम्यूनिटी कमज़ोर पड़ जाती है तभी कैंसर जैसी अवस्था का जन्म होता है।
लेकिन "ऐसी अवस्था, जिसमें मृत कोशिकाओं की संख्या किसी एक अंग अथवा स्थान पर आवश्यकता से अधिक मात्रा में बढ़ने लगे, तब इस अवस्था को ही कैंसर कहा जाता है।"यह कैंसर साधारण भी हो सकता है और जानलेवा भी।


कैंसर कितने प्रकार का होता है?

जिस किसी भी अंग में मृत कोशिकाओं की संख्या आवश्यकता से अधिक बढ़ जाती है,  उस अंग में कैंसर हो गया है। ऐसा कहा जाता है। इसके अनुसार तो कैंसर के अनेक प्रकार हो जाते हैं। जितने शरीर के अंग उतने ही कैंसर के प्रकार। लगभग 150 प्रकार के कैंसर होते हैं, लेकिन इनमें से कुछ अंगों के कैंसर अधिकतर लोगों को होते हैं।
  • ब्लड कैंसर
  • ब्रेस्ट कैंसर
  • फेफड़ों का कैंसर
  • जननांगों का कैंसर
सिर्फ ह्रदय अर्थात हार्ट ही ऐसा अंग है, जहां कैंसर नहीं होता क्योंकि उसमें सतत रक्त प्रवाह होता रहता है।
मस्तिष्क में कोशिका विभाजन का कार्य नहीं हो पता इसलिए वहां भी कैंसर का खतरा नहीं रहता। केवल 10% मस्तिष्क में ही जहां कोशिका विभाजन संभव है, वही कैंसर का खतरा रहता है।


कैंसर के मुख्य कारण

हमारी नेचुरल इम्यूनिटी जब भी किसी भी कारण से कमज़ोर पड़ती है, तो हमें कोई ना कोई रोग होते ही हैं! इसके अतिरिक्त भी अनेक ऐसे कारण हैं, जिसके कारण लोग कैंसर जैसे जानलेवा रोग के चंगुल में फस जाते हैं । इसके कुछ कारण नीचे दिए गए हैं।

बायोस्पी

जब भी हमारे शरीर में कहीं भी कोई गांठ या फिर अनचाही ग्रोथ दिखती है, तो वह कैंसरग्रस्त  (cancerous) है अथवा नहीं, इसका पता लगाने के लिए हम बॉयोस्पी तथा ऐसे ही कुछ और जांच करवाते हैं, जिसमें सेल्स को खरोंचकर निकाला जाता है। इस प्रकार खरोंचकर निकालने से उनका अधिकांश भाग चोटिल हो जाता है, उनमें  इन्फेक्शन हो जाता है। आगे चलकर यही कैंसर का कारण बन जाता है।

रेडियोथरेपी

यह कैंसर के चिकित्सा का एक रूप है, जिसमें रेडियो एक्टिव किरणों के माध्यम से अनचाही कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को समाप्त करने की कोशिश की जाती है। ऐसा करते समय उन कोशिकाओं के आसपास का स्थान भी प्रभावित हो जाता है तथा आगे चलकर यहां कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

कीमो थेरेपी

इस थेरेपी का जनक हिटलर था। इस थेरेपी का प्रयोग वह अपने शत्रुओं के लिए करता था लेकिन विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात उसके ट्रेन्ड(trained) सैनिक, डॉक्टरों से जा मिले तथा इस थेरेपी का प्रयोग कैंसर जैसे रोगों के लिए करने का मिथ फैला दिया। इस थेरेपी के कारण भी शरीर में कैंसर सेल का उत्पादन होने लगता है।

वैक्सीन तथा एस्पिरिन

आज से कुछ 70 साल पहले कहीं भी किसी भी प्रकार का कोई कैंसर नहीं पाया जाता था। जब अनेक रोगों के कारण अलग-अलग वैक्सीन लगनी शुरू हुई, उनके एक माइनर दुष्प्रभाव के रूप में कैंसर तेजी से फैलने लगा।
एस्पिरिन जैसी दवाइयां जिन्हें हम कभी बीमारियों को ठीक करने के लिए, तो कभी सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही लेना शुरू कर देते हैं, यह भी कैंसरग्रस्त सेल को जन्म देता है।


दूषित वातावरण तथा खान-पान

उचित वातावरण में रहने वाले लोग जिन्हें संतुलित आहार भी नहीं मिल पाता और ना ही पर्याप्त धूप तथा शुद्ध वायु मिल पाती है। ऐसे में उनकी नेचुरल इम्यूनिटी कमज़ोर पड़ जाती है तथा वे कैंसर जैसे रोगों से ग्रसित हो जाते हैं।

आज हम स्वाद के पीछे इतने पागल होते जा रहे हैं कि हम यह तक नहीं सोचते कि कौन सी चीज़ हमारे लिए फायदेमंद है और कौन- सी चीज़ विष के समान हैं। अनेक ऐसे फास्ट फूड जिनमें कुछ ऐसी चीजों का प्रयोग किया जाता है जो कैंसर कारक होते हैं, उन्हें हम बड़े ही चाव से खाते और खिलाते हैं।

फसलों की वृद्धि के लिए भी अनेक ऐसे कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है, जिनमें कैंसरजन्य तत्व पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त अनेक संकरित बीज जिन पर रासायनिक प्रतिक्रिया करके उन्हें अधिक उपज देने योग्य बनाया जाता है, उनके भी साइड इफेक्ट कैंसर के रूप में उभर के आ रहे हैं।

कैंसर के लक्षण

जैसा कि ऊपर बताया गया है, किसी भी अंग में असीमित कोशिकाओं का बढ़ जाना ही कैंसर है। जब कोशिकाएं दो से चार; चार से आठ;आठ से सोलह इस प्रकार वृद्धि करना शुरू करती हैं,  तो कुछ ही दिनों में पूरे शरीर के लिए यह स्थिति हानिकारक हो जाती है। इसलिए कभी-कभी कैंसर की लास्ट स्टेज में हमें पता चल पाता है कि कैंसर हुआ है। ऐसे में खुद को बचाने के लिए हम अनेक कोशिश करते हैं लेकिन वह असफल हो जाता है। इसलिए यह भ्रम फैल चुका है कि कैंसर का कोई इलाज नहीं है।

कोई भी रोग शरीर में जब भी आता है शरीर की अंदरूनी शक्ति हमें एक मैसेंजर की तरह कुछ लक्षण दिखाती है, जिन्हें अगर हम समय पर समझ लें, तो समय पर अपना उपचार करके हम अवश्य ही स्वस्थ हो सकते हैं। इनमें से कुछ लक्षण निम्नलिखित है।

  • शरीर दुबला पतला और कमज़ोर होने लगता है।
  • भूख लगना कम हो जाता है।
  • त्वचा पर कहीं-कहीं कुछ निशान दिखने लगते हैं तथा बाल भी अनावश्यक रूप से झड़ने लगते हैं।
  • कभी-कभी अचानक बुखार एवं उल्टियां आने लगती हैं।

कैंसर के लिए उपचार विधियां

कैंसर हमारी नेचुरल इम्यूनिटी कमज़ोर होने पर ही होता है। यदि समय पर हमें इसका पता चल जाए तो हम इसे आसानी से ठीक कर सकते हैं।
इसका पता लगाने के लिए जरूरी नहीं है कि हम बॉयोस्पी
जैसी जांच करवाएं जो खुद कैंसर का कारण बनती है। इसके कुछ लक्षणों के आधार पर हम अपनी डाइट को ठीक करके भी इसका उपचार कर सकते हैं। घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपचार में भी इसे ठीक करने के कई तरीके हैं।

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नेचुरोपैथी एक ऐसा इलाज है जो सिर्फ भोजन में सुधार करके रोगों को ठीक करता है। इस प्रकार से कैंसर को आसानी से ठीक किया जा सकता है, इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है।
इस पैथी में वनस्पतियों एवं फलों के सेवन पर विशेष ध्यान दिया जाता है और वह भी उचित समय और उचित मात्रा के साथ। यह पैथी चाइना की स्पेशल पैथी के रूप में विख्यात है।

नेचुरोपैथी के अनुसार कैंसर के किसी भी स्टेज का इलाज निम्नलिखित  बातों को सुधार कर आसानी से किया जा सकता है।


  1. कैंसर में जो कोशिका वृद्धि होती है, उन कोशिकाओं को पके हुए  भोजन से ही शक्ति मिलती है। इसलिए अन्न अथवा पके हुए भोजन  का सेवन कम अथवा नहीं के बराबर कर देना चाहिए।
  2. उसके स्थान पर वजन के अनुसार कच्ची और पत्तेदार सब्जियां, फल, अंकुरित अनाज, आदि का सेवन शुरू करना चाहिए।
  3. धूप में बैठने से हमारे रोम छिद्रों के माध्यम से धूप हमें मिलती है, जो शरीर के ऊपरी के साथ-साथ आंतरिक जीवाणुओं का भी नाश करती है। इसलिए कम- से- कम 45 मिनट तक धूप में अवश्य बैठना चाहिए।
  4. व्रत करने से हमारे शरीर में बढ़ रही  असीमित कोशिकाओं का विघटन होने लगता है, उनकी वृद्धि रुक जाती है, जो कि कैंसर का कारण है। इसलिए कम से कम 14 घंटे का व्रत रोज करना चाहिेए अथवा सप्ताह में 1 दिन का व्रत करना चाहिए इससे हमारी नेचुरल इम्यूनिटी बढ़ती है।




कैंसर के लिए आयुर्वेदिक उपचार


गिलोय, तुलसी, काली मिर्च आदि पदार्थों में कैंसर का नाश करने वाले तत्व पाए जाते हैं, यदि हम इनका रोजाना सही मात्रा में सेवन करें, तो कैंसर जैसे भयानक रोग से बच सकते हैं।

गेहूं के ज्वारे का रस एक अदभुत औषधि है, जो कैंसर जैसे रोगों को ठीक कर देती है। गेहूं के बीजों को मिट्टी में उगाया जाता है। जब उनकी लंबाई 9 इंच तक बढ़ जाती है, तब उनके पत्तों को चबाकर अथवा रस निकालकर गिलोय के रस  के साथ प्रयोग में लाया जाता है। इस रस की मात्रा कम से कम एक गिलास होनी चाहिए। ऐसा कम से कम 21 दिनों तक करना होता है। लेकिन यह भी ज़रूरी है कि इसका प्रयोग सही समय पर शुरू कर दें। कैंसर के अतिरिक्त अन्य रोगों में भी यह अत्यंत लाभकारी हैं।

निष्कर्ष

उचित खानपान, स्वच्छ पर्यावरण,योग- व्यायाम की नियमितता तथा पवित्र एवं निश्चिंत जीवन में कभी भी कोई रोग नहीं पनप सकता। यदि कोई रोग होता भी है, तो आसानी से ठीक हो जाता है। दुनिया के सभी ज्ञान के साथ अपने शरीर का भी थोड़ा ज्ञान होना चाहिए। शरीर में हो रहे परिवर्तनों को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसे ही कोई विपरीत लक्षण दिखाई दे, तुरंत अपने भोजन में एवं अन्य गतिविधियों में सुधार कर लेना चाहिए। ऐसा करके हम किसी भी रोग को आसानी से, अपने से दूर भगा सकते हैं।





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