रुद्राष्टक

 (इस पोस्ट में रुद्राष्टक का इतिहास एवं उसे पढ़ने से क्या लाभ होता है या बताया गया है।)


रुद्राष्टक का इतिहास

रुद्राष्टक तुलसीदास जी द्वारा रचितरामचरितमानस के उत्तरकांड में दिया गया है। यह काकभुशुण्डि जी के पूर्व जन्म के एक वृतांत के रूप में है, जिसमें यह बताया गया है कि जब कागभुशुण्डि जी एक ब्राम्हण शिष्य के रूप में थे और उन्होंने अपने गुरु का अपमान कर दिया था, तब गुरु का अपमान होने के कारण शिवजी उनसे रुष्ट हो गए थे, तब उन्होंने अपने गुरु के मार्गदर्शन द्वारा शिव जी को प्रसन्न करने के लिए यह रुद्राष्टक पढ़ा था, जिससे शिवजी उन पर प्रसन्न हुए थे तथा राम जी की अनन्य भक्ति का आशीर्वाद दिया था।

रुद्राष्टक की एक प्रति निम्नलिखित है--



नराणांं।।


रुद्राष्टक पढ़ने से लाभ


रुद्राष्टक पढ़ने से शिव जी की कृपा तो प्राप्त होती है साथ ही मानसिक शांति भी मिलती है। बहुत ज़्यादा जप-तप जो लोग नहीं कर सकते, वे केवल रूद्राष्टक का पाठ करके ही शिव जी की कृपा को प्राप्त कर सकते हैं। इस रुद्राष्टक के पढ़ने से ब्राह्मण के ऊपर शिवजी की कृपा हुई थी और शिव जी ने आशीर्वाद दिया था कि जो भी यह रुद्राष्टक पढ़ेगा, उस पर सदा मेरी कृपा रहेगी।

Comments

Popular posts from this blog

शादी की सालगिरह के लिए कविता

श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द..(Worksheet)

Worksheet for Hindi grammar