कहानी लेखन

 कहानी लेखन हिंदी साहित्य की एक ऐसी विधा है, जिसमें भूतकाल में घटित किसी रोमांचक घटना को लिखित रूप में व्यक्त किया जाता है। किसी भी कहानी को व्यवस्थित रूप से लिखने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी होता है। आइए हम उन बातों को जानें-

  • कहानी लेखन में सरल भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • इसमें छोटे-छोटे वाक्य लिखने चाहिए।
  • कहानी का आरंभ रोचक होना चाहिए।
  • विराम चिन्ह का व्यवस्थित एवं उपयुक्त प्रयोग करना चाहिए।
  • कहानी लेखन में अधिकांश भाग भूतकाल से संबंधित शब्दों के प्रयोग से लिखा जाना चाहिए, लेकिन किसी की कही हुई अथवा सोची हुई बात को उद्धरण चिह्नों(" ") का प्रयोग करके ज्यों का त्यों लिख देना चाहिए।
  • कहानी को एक उपयुक्त शीर्षक (Title) देना चाहिए। शीर्षक बहुत ही कम शब्दों का होना चाहिए, अधिक बड़ा नहीं होना चाहिए।
  • कहानी की घटनाओं को क्रमबद्ध तरीके से लिखना चाहिए।
  • कहानी की किसी एक घटना को अधिक विस्तार नहीं देना चाहिए।
  • कहानी छोटी हो, समझने योग्य हो, उस कहानी से कोई शिक्षा भी मिले।


अब हम उपर्युक्त बातों पर ध्यान देते हुए कहानी लेखन का अभ्यास करेंगे। हम कुछ बिंदुओं का प्रयोग करके एक प्यासे कौवे की कहानी लिखेंगे-

प्यासा कौवा....... भटकना..... एक घड़े का नजर आना.... घड़े में जल का नीचे होना...... घड़े में कंकड़ का डालना.... पानी पीकर प्यास बुझाना...... खुशी से उड़ जाना...... सीख।


कहानी का शीर्षक- ‌ प्यासा कौवा

एक समय की बात है, गर्मियों का दिन था। सारे तालाब सूख चुके थे। एक कौवा बहुत प्यासा था, वह पानी की तलाश में इधर -उधर भटक रहा था।
अचानक कौवे की नजर छत पर रखे एक घड़े पर पड़ी। कौवे ने जाकर देखा, तो घड़े में पानी बहुत नीचे था। वहां तक उसकी चोंच नहीं पहुंच पा रही थी। कौवे को एक उपाय सूझा। वह अपनी चोंच से इधर-उधर से छोटे-छोटे कंकड़ लाकर पानी में डालने लगा। पानी जल्दी ही ऊपर आ गया। 
कौवा खुश हो गया, उसने जी भर कर पानी पिया और  अपनी प्यास बुझाकर उड़ गया ।

सीख-हम अपनी चतुराई और सूझबूझ से किसी भी मुश्किल का सामना कर सकते हैं।

बच्चों, जैसे हमने प्यासी कौवे की कहानी लिखी, उसी तरह हम कोई भी कहानी लिख सकते हैं।

जितने अधिक रुचि के साथ लिखेंगे, उतना ही अच्छा कहानी लेखन कर पाएंगे।

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